नए साल में
कल की बात
क्यों ना करें ,
कल से ही तो आज है....
कल थोड़ा गम था
आज खुशी की आशा है।
कल अंधकार था
आज रोशनी की ओर बढ़ते कदम है....
कल, कल - कल बहती नदिया थी
आज नदिया का सागर
बन जाने की तमन्ना है.....
कल की परछाई जब आज है ,
फिर क्यों ना करें
बातें कल की ,
आज का दिन भी
बन ही जाएगा कल।
बात करें हम कल ही की
आने वाले कल की
आज की मुस्कान के
कल खिलखिलाहट बन जाने की...
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